““मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जनता के सवाल चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शीता?” की जिम्मेवारी किसकी
मतदाता सूची का संशोधन (SIR), Form-6 में बदलाव, निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियाँ और आयोग की पारदर्शिता हैं की जिम्मेवारी से ज्ञानेश जी भागते नहीं बन रहा हर चौक-चौराहे पर एक सवाल पुछती जनता
- नमस्कार,
मैं हूँ रविश कुमार
आप देख रहे हैं
“बात जनता की साथ रविश के जनता के समस्याओं का समाधान संविधान के साथ जनता के अधिकारों की रक्षा संविधान के साथ”।
आज की स्थिति और परिस्थितियों को देखते हुए जनता के सवाल किसी राजनीतिक दल से नहीं,
बल्कि उस संवैधानिक संस्था से हैं
जिस पर देश के चुनावों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी है।
इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त हैं ज्ञानेश कुमार।
उन्होंने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था।
लेकिन आज जनता के सामने कुछ महत्वपूर्ण सवाल हैं।

1.क्या किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटने से पहले पर्याप्त सूचना, सुनवाई और अपील का प्रभावी अवसर सुनिश्चित किया गया था विगत चुनाव में या फिर किया जा रहा है?
2.Form-6 में बदलाव का कानूनी आधार क्या था?
इसे लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी?
और क्या इस पर सभी संबंधित निर्वाचन आयुक्तों की सहमति थी? और अगर है तो उसे जनता जानना चाहती है
एक हालिया रिपोर्ट में दो निर्वाचन आयुक्तों की लिखित आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।
वहीं निर्वाचन आयोग का कहना है कि अलग-अलग विचार आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और पिछले एक वर्ष के निर्णय पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय रहे हैं।
तो सवाल है—
3.क्या आयोग इन महत्वपूर्ण निर्णयों से संबंधित नोट्स, प्रक्रियाओं और कारणों को सार्वजनिक करके जनता का भरोसा और मजबूत करेगा?

“वोट चोरी” के आरोप
देश के अलग-अलग राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं।
लेकिन आरोप और प्रमाण एक चीज नहीं हैं।
इसलिए असली सवाल यह है—
4.क्या निर्वाचन आयोग प्रत्येक ऐसे आरोप का डेटा और दस्तावेजों के आधार पर सार्वजनिक जवाब देगा, ताकि जनता स्वयं तथ्य देख सके?
सभी राजनीतिक दलों के लिए समान नियम
निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी केवल मतदान करवाना नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में समान नियम लागू करना भी है।
इसलिए जनता पूछ सकती है
5.आचार संहिता के उल्लंघन पर कार्रवाई के स्पष्ट और समान मानदंड क्या हैं?
क्या आयोग अपनी कार्रवाई और उसके आधार का पर्याप्त सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराएगा?
6.अगर लक्ष्य है कि कोई पात्र मतदाता बाहर न रहे, तो मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान हटाए गए नामों, पुनः जोड़े गए नामों और आपत्तियों का पूरा पारदर्शी डेटा जनता के सामने कब आएगा?
भारतीय लोकतंत्र में सवाल पुछना किसी व्यक्ति संस्था या सरकार विरोधी अभियान नहीं है
इसलिए सवाल इसलिए जरूरी हैं
क्योंकि मतदाता का वोट केवल एक बटन दबाना नहीं—लोकतंत्र में उसकी भागीदारी का अधिकार है।
आप देख रहे हैं
“बात जनता की साथ रविश के जनता के समस्याओं का समाधान संविधान के साथ जनता के अधिकारों की रक्षा संविधान के साथ”।
