कब तक सहेंगा बिहार पहले जमुई,बाढ़ के लाखाचक,समस्तीपुर,बांका और अब बेगूसराय में बेटियों संग दरिंदगी
आखिर कब तक सहेंगा बिहार बिहार में बेटियों संग बलात्कार
क्या अब बिहारी सारी मर्यादाओं को पार कर बेटियों के बलात्कार पर उतर आया है आयें दिन ये घटनाएं आम हो चुकी है बिहार का ये संस्कार तो रहा नहीं ये तो महापुरूषों विद्वानों की धरती रही है इन विद्वानों ने तो पुरे संसार को गौरवान्वित किया है इतिहास के अनुसार तो ये संस्कार मनुवादीयों का रहा फिर भी बर्षो से ये घटनाएं काफी समय से छिट पुट हो रही थी अब आखिर ऐसा क्या हुआ मुरेट्ठा चौधरी की सरकार में मतलब आर एस एस का कठपुतली के आते ही जैसे लगता है कि बिहार में जातिगत हत्याएं और बेटियों संग बलात्कार की घटनाओं की बाढ़ ही आ गया है आखिर आर एस एस के लोग इस घटाओं से आम आवाम को इतना आतंकित और डराना क्यों चाहती है असली बात यह है कि देश में रोजगार नहीं शिक्षा पद्धति पुरी तरह ध्वस्त आर्थिक व्यवस्था चौपट बलात्कार और अन्धविश्वास चरम पर ISRO जैसी संस्थाओं में निजीकरण की शुरुआत आन्दोलन रत और हक अधिकार की मांग कर रहे छात्र रोड पर चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने में असमर्थ चुनाव आयोग की अयोग्यता पर उठ रहे सवालों की लीपापोती
इन सारी घटनाओं की जिम्मेदारी किसकी है कौन है इसका असली जिम्मेदार जो काफी समय से छुपा बैठा था अब जैसे ही सत्ता की नशा सिर चढ़ा मनुवाद ब्राह्मणवाद का रंग हर चौक चौराहे पर हर बेटियों की चीख और हर बेरोजगार की जुबान बन गई जब-जब इस संगठनों को सत्ता मिला इसने आम जनता के मौलिक अधिकार को ही छिन्न-भिन्न करने की कोशिश किया 90% जनसंख्या को येन केन प्रकारेन उसके मौलिक अधिकार को समाप्त करने की कोशिश करता रहा है और संविधान पर हमला करता है कौन है बेटियों की चीख और बेरोजगारो के दुःख का जिम्मेदार पुछता है भारत पुछता है हर भारतीयों की जुबान




