बिहार की मर्यादा दांव पर
बिहार में बेटियों की सुरक्षा और न्याय पर सवाल
बिहार में बेटियों की सुरक्षा और न्याय पर सवाल
पड़ताल: कानून सबके लिए बराबर है या नही
बिहार में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध की घटनाओं ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और पीड़ित परिवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
लेकिन इन सवालों के बीच एक बात सबसे महत्वपूर्ण है—
किसी भी अपराधी की पहचान उसकी जाति या राजनीतिक पहुंच से नहीं, बल्कि कानून और उपलब्ध सबूतों से तय होनी चाहिए।
आज हम इसी सवाल की पड़ताल करेंगे।
मामला पहला — जमुई
जमुई में बच्ची के साथ कथित यौन अपराध के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है और जांच में प्रगति की बात सामने आई है।
यहां सवाल यह है कि क्या पुलिस ने मामले में निष्पक्ष जांच, साक्ष्य जुटाने और आरोपियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई सुनिश्चित की?
और क्या पीड़ित परिवार को पर्याप्त सुरक्षा और कानूनी सहायता मिल रही है?
दूसरा मामला — मौसम कुमारी
पटना जिले के बेलछी थाना क्षेत्र के लाखाचक गांव की मौसम कुमारी, पिता अजय कुमार, से जुड़ी घटना को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।
दावा किया जा रहा है कि बच्ची के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई।
लेकिन इस मामले में कई बातें ऐसी हैं जिन्हें आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफआईआर और न्यायिक प्रक्रिया से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।
कुछ लोगों की ओर से राजनीतिक संरक्षण और जांच को प्रभावित करने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
इसलिए हमारा सीधा सवाल है—
क्या जांच पूरी तरह स्वतंत्र होगी?
क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों को पारदर्शी तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा?
क्या पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी जाएगी?
और क्या आरोप चाहे किसी पर भी हों, पुलिस कार्रवाई राजनीतिक या जातीय प्रभाव से मुक्त रहेगी?
सबसे बड़ा सवाल — कानून सबके लिए बराबर?
बिहार में समय-समय पर पुलिस कार्रवाई और आपराधिक मामलों को लेकर जाति और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर भेदभाव के आरोप लगाए जाते रहे हैं।
सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस में यह आरोप भी सुनाई देता है कि अलग-अलग जातियों के लोगों के साथ अलग-अलग तरीके से कार्रवाई होती है।
लेकिन आरोप और प्रमाण अलग-अलग चीजें हैं।
इसलिए ‘बात जनता की’ का सवाल किसी जाति के पक्ष या विपक्ष में नहीं है।
सवाल है—
क्या संविधान का अनुच्छेद 14—कानून के समक्ष समानता—जमीन पर भी समान रूप से लागू हो रहा है?
क्या SC, ST, OBC, EBC, सवर्ण—हर नागरिक के लिए कानून की कसौटी एक जैसी है?
क्या महिला और बच्ची की सुरक्षा राजनीतिक पहचान से ऊपर है?
और क्या किसी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई उसके सामाजिक या राजनीतिक प्रभाव के बजाय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होती है?
सत्ता और प्रशासन से जनता के सवाल
अगर किसी अधिकारी, नेता या जनप्रतिनिधि पर अपराधी को संरक्षण देने का आरोप लगता है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अगर आरोप झूठा है तो तथ्य सामने आने चाहिए।
और अगर आरोप सही साबित होता है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।
कानून का शासन तभी मजबूत होगा जब सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों के लिए एक ही कानूनी कसौटी हो।
बेटियों की सुरक्षा पर अंतिम सवाल
बिहार की बेटियां सुरक्षित कब होंगी?
बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर अपराधों में जांच कितनी तेज और पारदर्शी होगी?
पीड़ित परिवारों को पुलिस सुरक्षा और कानूनी सहायता कब सुनिश्चित होगी?
और सबसे महत्वपूर्ण—
क्या बिहार में न्याय जाति, राजनीतिक प्रभाव और दबाव से ऊपर उठकर मिलेगा?
इन सवालों का जवाब किसी राजनीतिक दल के नारे से नहीं, बल्कि एफआईआर, जांच, फोरेंसिक साक्ष्य, न्यायालय और अंतिम कानूनी निर्णय से मिलना चाहिए।
यह किसी एक जाति या राजनीतिक दल के खिलाफ अभियान नहीं है।
यह सवाल है कानून के राज का।
यह सवाल है बिहार की बेटियों की सुरक्षा का।
और यह सवाल है भारतीय संविधान में दिए गए समानता और न्याय के अधिकार का।
आप देख रहे थे ‘बात जनता की’।
जनता सवाल पूछेगी, सरकार जवाब देगी—और अंतिम फैसला कानून करेगा।
जय हिन्द।
जय भारत।
जय संविधान।
बिहारी राजनेता बड़े बड़े मीडिया चैनल बिहारी मर्यादाओं को तार तार करने में मशगूल हैं सारे ब्यूरो क्रैट नेता मंत्री मुख्यमंत्री या फिर जातंकवादी मनो बिहार में मनुवाद ब्राह्मणवाद समाजवादीयों को अपने अपने बाहुबल से समाप्त करने में इस तरह से लगी हुई है जैसे लगता है सत्ता अब मनुवादीयों के हाथ में कभी आने ही वाली नहीं है इसलिए जो मिला जहां मिला वहीं से लूट खसोट कर रख लेना है और भय इतना भर देना है जैसे आने वाले पांच दस साल तक समाजवादी उठकर खड़ा नहीं हो सके या फिर कोई सबूत पेश न कर सके बिहार में हो रहे महिलाओं का बलात्कार जाति पुछ कर बिना छान बीन किए गोली मारना अयोग्य लोगों को लोकतांत्रिक संवैधानिक पदों पर बैठाना अपने विपक्षियों को बिना कारण के प्रताड़ित करना एक ही अपराध के लिए अपराधियों को कानूनी तौर तरीके से नहीं बल्कि जाति के हिसाब से दंड देना
यादव है तो एनकाउंटर
पासवान है तो प्रताड़ित करके छोड़ना यादव वाला टाइलेन्ट दिखाया तो एनकाउंटर निश्चित है
चमार है तो प्रताड़ित करके छोड़ना
मतलब SC/ST/OBC के सभी साहसी जातियां जो जिस प्रकार का काबिलियत दिखाएगा दंड उसी प्रकार से निर्धारित किया जाएगा
अभी अभी बच्चीयों के बलात्कार का दो घटनाएं बिहार में सामने आयी है जिसमें जमुई वाली घटनाओं में कारवाई करते हुए पुलिस को बड़ी कामयाबी हासिल हुई परन्तु दुसरी घटना बेटी मौसम कुमारी पिता अजय कुमार ग्राम-लाखाचक थाना-बेलछी प्रखंड-बाढ़ जिला-पटना में दिनदहाड़े बलात्कार कर दिनदहाड़े गला रेत कर मार दिया जाता है इसके बावजूद मौसम कुमारी के परिजन आशंकित और डरा हुआ है कि कामो सिंह जो कि स्थानीय बीजेपी विधायक से संरक्षित है उसका भी मडर न करवा दें पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पैसा खिला कर अपने पक्ष में करके बलात्कार के केस पर जो कानूनी बी एन एस की धाराएं लगती उसे ही खत्म न कर दे
जरा सोचिए आज की ये घटनाएं और घटनाओं पर हो रही कार्रवाई बीजेपी आरएसएस मंत्रीमंडल में बैठे लोगों की मानसिकता को साफ साफ प्रर्दशित कर रही है
इसके लिए जब आम आवाम सरकार से सवाल पूछ लिया अब तो मनुस्मृति की कठोरतम धारा लगाईं जाएगी हो सके तो उसे उसके परिवार को मौत का डर सताने लगेगा
आखिर चल क्या रहा है क्या कोई SC/ST/OBC के नेता मंत्री/बड़े बड़े ब्यूरो क्रैट सत्ता में सिर्फ और सिर्फ मनुवादीयों की दलाली करने में लगी है या फिर कोई भी पीड़िता के साथ खड़ा भी होगा या फिर आम आवाम को ही रोड़ पर उतरना होगा पुछता है भारत पुछता है बिहार कि बिहार में बेटियों को बलात्कार से निजात कब मिलेगा कब होगा न्याय बिहार के SC/ST/OBC को कब मिलेगा सम्मान क्यों कि गरीबों के नेता लालू यादव जो उसके लिए लड़ता था उसके लिए मरता था उसे बदनाम कर जेल भेज अपमानित किया गया है
(MSS यादव बैठकी पटना के लोगों ने इस मामले को लोगों के संज्ञान में लाया इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद आभार व्यक्त करता हूं 🙏)
पुछता है भारत भारतीय लोकतंत्र को शासन प्रशासन को इस वर्ग के सम्मान के लिए कब सम्मानित किया जाएगा
जय हिन्द जय भारत जय संविधान